गणेश उत्सव और दुर्गोत्सव में नदी व तालाबों को प्रदूषण से बचाने प्रतिमाओं के विसर्जन पर विशेष ध्यान रखने के निर्देश एनजीटी ने दिए हैं।

गणेश उत्सव और दुर्गोत्सव में नदी व तालाबों को प्रदूषण से बचाने प्रतिमाओं के विसर्जन पर विशेष ध्यान रखने के निर्देश एनजीटी ने दिए हैं। इसके लिए बकायदा गाइडलाइन भी जारी है। हालांकि एनजीटी के निर्देश के परिपालन में रीवा शहर में दो जगहों पर प्रशासन द्वारा विसर्जन की तैयारी की जा रही है। लेकिन हकीकत यह है कि शहर में आठ स्थानों पर प्रतिमाओं का विसर्जन होता है। 6 जगहों पर तो प्रतिमाएं सीधे नदियों में प्रवाहित कर दी जाती है। ऐसे में नदियों को प्रदूषण से बचाने के दावे हवा हवाई साबित हो जाते है।


बता दें कि नदियों में प्रदूषण को रोकने के लिए निर्देश है कि प्रतिमाओं का विसर्जन विशेष कुंड में कराया जाए। इसका पालन कराने के लिए नगर निगम द्वारा रीवा शहर में हर साल गणेशोत्सव के दौरान बीहर नदी पर बाबा घाट और बिछिया नदी में छतुरिहा घाट में कुंड तैयार कराया जाता है। ये कुंड गणोशोत्सव और दुर्गोत्सव में उपयोग किए जाते हैं। बाबा घाट में बीते मंगलवार से कुंड निर्माण का कार्य शुरू हो गया है। जिसकी तैयारियां शुक्रवार तक नगर निगम द्वारा पूर्ण कर ली जाएगी।


दो लाख रुपए में तैयार होता है कुंड:

रीवा जिला प्रशासन द्वारा बाबा घाट और छतुरिहा घाट में ही विसर्जन की व्यवस्था की जाती है। बीहर और बिछिया नदी में तैयार किए जाने वाले अस्थाई कुंड को बोरियों में बालू भरकर बनाया जाता हैं। हर साल इसमें लगभग दो लाख रुपए खर्च होता है। बाबा घाट और छतुरिहा घाट में ये विसर्जन कुंड नदी में लगभग ढाई हजार वर्गफिट क्षेत्र में तैयार किए जाते हैं। इन दोनों जगहों पर घाट होने से प्रतिमाओं के विसर्जन में सुविधा होती है।


इन स्थानों पर भी होता है विसर्जन

  1.  छोटी पुल क्षेत्र में दो जगह।
  2. बीहर नदी में स्थित पुष्पराज नगर घाट।
  3. निपनिया पुल के बगल में।
  4. उपरहटी स्थित राजघाट में।
  5. बिछिया पुल पर स्थित घाट में।
  6.  लक्ष्मणबाग घाट में।


19 सितंबर को होगा विसर्जन

गणेश चतुर्थी के दिन बप्पा के भक्त अपने घर में उनकी प्रतिमा स्थापित कर विधि-विधान से पूजा करते हैं। बप्पा अपने आशीर्वाद से अपने भक्तों के सभी विघ्न-बाधाओं दूर कर देते हैं। अनंत चतुर्दशी के दिन यानी 19 सितम्बर को बप्पा की विदाई होगी। हिंदू शास्त्र के अनुसार मिट्टी के बने बप्पा की प्रतिमा का पूजा करना बेहद उत्तम माना है। यही वजह है कि मिट्टी की मूर्तियां ही लोग स्थापित करते हैं। प्लास्टर ऑफ पेरिस की प्रतिमाओं को लेकर पिछले कुछ वर्षो से जो सख्ती है, उससे अब यह बाजार से गायब ही हो गई है।


विसर्जन स्थल में सिर्फ 10 लोगों को अनुमति

प्रतिमा विसर्जन को लेकर शासन ने जो गाइडलाइन तय की है, उसमें कोरोना को देखते हुए दस लोगों को ही प्रतिमा विसर्जन के लिए जाने की अनुमति है। नगरीय निकायों को जलाशयों, नदियों और तालाबों में विसर्जन के लिए विसर्जन कुंड का निर्माण करने और मूर्ति एवं पूजा सामग्री जैसे फूल, वस्त्र, कागज एवं प्लास्टिक से बनी सजावट की वस्तुओं को मूर्ति विसर्जन के पूर्व अलग करने के बाद उनका अलग से डिस्पोज करने के निर्देश है, ताकि नदी व तालाब में प्रदूषण की स्थिति नियंत्रित हो सकें।

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