भोपाल में भी होगा अब लिवर ट्रांसप्लांट: भोपाल में पहला लिवर ट्रांसप्लांट किया गया मरीज हुआ ठीक 8 दिन रहेगा ICU में अनियमित खान-पान की दिनचर्या से हो रहा लिवर डैमेज

                     डॉ. सहोता

भोपाल में लिवर ट्रांसप्लांट करने वाली टीम को लीड करने वाले डॉक्टर गुरसागर सिंह सहोता ने बताया कि मरीज का लिवर काम कर रहा है। मरीज की हालत ठीक है। अभी ICU में है। शुरुआती कुछ दिन क्रिटिकल होते हैं। इंदौर की 52 साल की डेंटल सर्जन डॉ. संगीता पाटिल का लिवर भोपाल में एडमिट 35 साल के मरीज को लगाया गया है। बंसल अस्पताल में गुरुवार को 8 डॉक्टरों की टीम ने 8:30 घंटे तक ऑपरेशन कर लिवर ट्रांसप्लांट किया।



डॉ. सहोता ने बताया कि लिवर के डैमेज होने का कारण लंबे समय तक शराब का सेवन, अधिक समय तक हेपेटाइटिस इंफेक्शन और लिवर में अधिक चर्बी होना है। ज्यादा तला हुआ खाना खाने, अनियमित दिनचर्या भी लीवर को प्रभावित कर रही है। उन्होंने बताया कि लिवर सिरोसिस होने के बाद दवा से कोई इलाज नहीं है। इसका इलाज लिवर ट्रांसप्लांट ही है, इसलिए लिवर की बीमारी से संबंधित लक्षणों को नजरअंदाज न करें।


डॉ. सहोता ने बताया कि लोग लीवर की बीमारी को लेकर जागरूक हो रहे हैं, हालांकि कुछ लोग लिवर की बीमारी से संबंधित लक्षणों को नजरअंदाज कर घर पर ही दवाओं से इलाज करते हैं। ऐसे में बीमारी गंभीर हो जाती है।


क्या है लक्षण

डॉ. सहोता ने बताया कि भूख नहीं लगना, वजन कम होना, थकान होना, एनर्जी लेवल कम होना समेत अन्य प्रारंभिक लक्षण है। इसके बाद सिरोसिस का स्तर बढ़ने पर बीमारी के गंभीर होने पर पीलिया आना शुरू हो जाता है। पैरो में सूजन रहती है। पेट फूलने लगता है। पेट में पानी, खून की उल्टी होना समेत अन्य कारण है।


किन चीजों में रखे सय्यम:

  1. यदि आपको लिवर सिरोसिस शराब पीने के कारण हुआ है तो शराब का सेवन करना बंद कर देना चाहिए। शराब लिवर को तेजी से डैमेज करती है।
  2. खान-पान में तेल और मसाले वाला भोजन कम करें। आपने आहार में ताजी हरी सब्जियां, फल को शामिल करें। चाय, कॉफी कम लें।
  3. आपको यदि फैटी लिवर हो रहा है तो आपको स्वस्थ्य वजन को बनाए रखना चाहिए, क्योंकि लिवर की समस्या से आपको सिरोसिस हो सकता है, इसलिए रोजाना व्यायाम करें।

सड़क हादसे में घायल हुई थीं, डॉक्टरों ने ब्रेन डेड घोषित किया था

52 वर्षीय डॉ. संगीता पिछले दिनों सड़क हादसे में घायल हो गई थीं। उन्हें एक निजी अस्पताल में भर्ती किया गया था। इस दौरान उनके ब्रेन डेड की स्थिति को देखते हुए उन्हें चोइथराम अस्पताल में रैफर किया गया था। बुधवार शाम 6 बजे डॉक्टरों की कमेटी ने ब्रेन डेड सर्टिफाइड किया। परिवार की सहमति के बाद इंदौर सोसायटी फॉर ऑर्गन डोनेशन सक्रिय हुई और इंदौर कमिश्नर डॉ. पवन कुमार शर्मा से चर्चा कर ग्रीन कॉरिडोर तैयार करवाया।


डॉ. सहोता ने बताया कि 35 वर्षीय मरीज का लिवर सिरोसिस की वजह से डैमेज हो गया था। वह दो से तीन महीने से लिवर ट्रांसप्लांट कराने के लिए प्रयास कर रहे थे। उनको लाइफ को रिस्क था। हमें इंदौर में एक मरीज के ब्रेन डेड होने की सूचना मिली। इसके बाद मरीज को अस्पताल में भर्ती कराया गया। हमारी टीम ने इंदौर और भोपाल दोनों जगह ऑपरेशन कर ट्रांसप्लांट को सफल बनाया। डॉ. ने बताया कि लिवर को इंदौर से लाने में सरकार की तरफ से भी सपोर्ट मिला।


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