61 साल का हुआ गांधीसागर डैम:बिना मशीनरी के बना था 1,685 फीट लंबा और 204 फीट ऊंचा डैम, लागत 13.60 करोड़ रुपए एक बार जरुर पढ़े इस डैम के बारे में

मंदसौर जिले में स्थित गांधीसागर बांध शुक्रवार को 61 साल का हो गया है। इसे बनाने में किसी भी मशीन का उपयोग नहीं किया गया था। इसका पूरा काम पारंपरिक औजारों से ही हुआ था। यही कारण है कि इसे एशिया की पहले मानव निर्मित बांध होने का गौरव प्राप्त है। गांधी सागर बांध भारत की चंबल नदी पर निर्मित 4 प्रमुख बांधों में से एक है। यह बांध मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले के गरोठ में स्थित है।

बांध इतने लंबे सफर के बाद अब बिजली उत्पादन से लेकर सिंचाई योजनाओं का जनक और पर्यटन का हब भी बन रहा है। मंदसौर से करीब 150 किमी दूर यह बांध तत्कालीन चीफ इंजीनियर एके चार, अधीक्षण यंत्री सीएच सांघवी, सिविल इलेक्ट्रिकल शिवप्रकाशम के मार्गदर्शन में बना था।

बांध की गुणवत्ता व एशिया के सबसे कम खर्च और सबसे कम समय सीमा में बनने वाले बांध की समय-सीमा में पूर्ण होने पर चार चीफ इंजीनियर को पद्मश्री की उपाधि से अलंकृत कर सम्मानित किया गया था।

इंदिरा गांधी के जन्मतिथि के कारण तय की थी यह तिथि


19 नवंबर 1960 को यह बांध तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के हाथों देश को समर्पित किया गया। यह तिथि उनकी पुत्री इंदिरा गांधी की जन्मतिथि के कारण चयन की गई थी। बांध की योजना 1950 में बनी थी। बांध का मॉडल खडगवासला रिसर्च इंस्टीट्यूट पुणे द्वारा बनाया गया था। बांध का शिलान्यास 1954 में तात्कालिक प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने किया था। बांध 6 साल में बनकर तैयार हुआ। इसकी लागत करीब 13.60 करोड़ आई थी। बांध में जल विद्युत ग्रह 4.79 करोड़ में बनकर तैयार हुआ था।

शुरू में इसे चंबल घाटी परियोजना चंबल वैली प्रोजेक्ट्स का नाम दिया गया था। जिसे चार चरणों में पूरा किया जाना था। प्रथम चरण में गांधी सागर, दूसरे में राणा प्रताप सागर रावतभाटा, तीसरे में जवाहर सागर, कोटा डैम और चौथे में कोटा बैराज। पहले तीनों बांधों से विद्युत उत्पादन और चौथे से सिंचाई का लक्ष्य रखा गया था।

कुल मिलाकर इंटरनेशनल कंट्रोल बोर्ड के निर्देशन में मध्यप्रदेश और राजस्थान की धरती को एक सिंचाई परियोजना देना थी। बांध की लंबाई 1685 फीट और ऊंचाई 204 फीट है। जलाशय का क्षेत्रफल 660 वर्ग मीटर है। बांध में 23025 वर्ग किमी का जल ग्रहण क्षेत्र है। बांध में 10 बड़े और 9 छोटे गेट हैं। बांध से करीब 6 लाख हेक्टेयर भूमि पर सिंचाई होती है।

कभी ऐसा था गांधीसागर बांध।

कभी ऐसा था गांधीसागर बांध।

बांध में 7 नदियां मिलती हैं


बांध निर्माण के दौरान सबसे अधिक नुकसान झेला नीमच जिले ने बांध के निर्माण के समय अविभाजित मंदसौर जिले के 228 गांव डूब के कारण खाली कराए थे। विभाजन के बाद 169 गांव नीमच व 59 गांव मंदसौर जिले के प्रभावित हुए। नीमच के रामपुरा में बांध से कई लोग विस्थापित हुए, लेकिन कई इलाकों का भूमिगत जलस्तर भी बढ़ा। मप्र-राजस्थान सीमा में बांध बनने के कारण इस बांध का सबसे ज्यादा फायदा राजस्थान को हुआ है।

वहां कई शहर में पेयजल की पूर्ति हो रही है। रावत भाटा का परमाणु केंद्र बांध के पानी पर निर्भर है। पानी की पूर्ति से लेकर यहां बनने वाली बिजली की पूर्ति भी राजस्थान को हुई। प्रदेश की सीमा में बांध होने के बाद भी अब गांधीसागर से जिले में सिंचाई योजना और जलापूर्ति योजना आ रही है।

सैलानियों से लेकर जीवों को कर रहा आकर्षित


गांधीसागर बांध अपने आप में अद्भुत है। विकसित होते क्षेत्र के चलते अब यह स्थान पर्यटकों को आकर्षित कर रहा है तो वन्य क्षेत्र बेहतर होने के कारण यहां वन्यजीवों के लिए भी वातावरण अनुकूल है। ऐसे में वन्यजीवों को भी आकर्षित कर रहा है तो सिंचाई से लेकर जलापूर्ति की कई बड़ी योजनाएं भी बन रही है। गांधीसागर के चाररों और फैली हरियाली यहां आने वाले व्यक्ति को प्रकृति के नजदीक ले जाती है। इतना ही नहीं वन्यक्षेत्र में औषधी व कई दुर्लभ जड़ी बुटिया भी हैं।

बांध की खूबसूरती देख मोहित हुए थे यूनेस्को के प्रोफेसर


गतवर्ष गांधी सागर बांध डूब क्षेत्र में विकास की संभावनाओं पर अध्ययन करने आए यूनेस्को के प्रोफेसर बांध की खूबसूरती और बनावट पर मोहित हो गए थे। जल संसाधन विभाग के दस सदस्यों के साथ आए प्रोफेसर डॉ. पीटर वांडर जॉज एवं डॉ. नोरा वॉन ने इस दौरान डेम का जायजा लिया था। यहां की भौगोलिक स्थिति एवं सुंदरता को देखकर उन्होंने इतनी मनमोहक कृति बनाने के लिए भारत के पहले प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू को बधाई का पात्र बताया था।

जानिए बांध के बारे में

  • योजना बनी- मार्च 1950 मेंं।
  • शिलान्यास मार्च 1954 में।
  • शिलान्यास किया- पं. नेहरू ने।
  • योजना पूरी -19 नवंबर 1960 में।
  • बनने में लगे थे 6 साल।
  • लागत आई – 13.60 करोड़ रुपए।
  • जल विद्युत गृह बना- 4.79 करोड़ में।
  • जल ग्रहण क्षेत्र- 23025 वर्ग किमी है।
  • सात नदियां मिलती हैं।
  • अधिकतम जल की मात्रा 1979.10 करोड़ घन मीटर है।
  • बांध की ऊंचाई 62.17 मीटर (204.0 फीट) है।

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