Rewa News: समान थाने में दर्ज कराई गई शिकायत, खिड़की तोड़कर बाल सुधार गृह से 5 बाल अपचारी भागे

रीवा: खिड़की तोड़कर बाल संप्रेक्षण बंदी गृह से पांच बाल अपचारी बच्चे फरार हो गए। रविवार की सुबह हुई घटना से हड़कंप मच गया। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और बच्चों के संबंध में जानकारी सभी थानों को भिजवाई। हालांकि उनका अभी तक पता नहीं चल पाया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

बताया गया कि बाल संप्रेक्षण बंदी गृह में बाल अपचारी बच्चों को रखा गया था। उनके खिलाफ मामला न्यायालय में विचाराधीन है। रविवार की सुबह यहां से खिड़की तोड़कर पांच बच्चे लापता हो गए। इनमें एक युवक बालिग हो गया था, जिसको सिवनी जेल में शिफ्ट करना था। उसे ले जाने के लिए एसएएफ की गार्ड कार्यालय आई थी।

गार्ड के पहुंचने के पहले ही वह अपने साथियों के साथ बाल संप्रेक्षण बंदी गृह की खिड़की तोड़कर फरार हो गया। कुछ देर बाद जब कर्मचारी उसे लेने के लिए पहुंचे तो उसके सहित पांच बच्चों को गायब देखकर उनके होश उड़ गए। खिड़की टूटी देखकर उन्हें मामला समझते देर नहीं लगी। तत्काल घटना की सूचना पुलिस को दी गई जिस पर पुलिस मौके पर पहुंच गई। भागे हुए पांचों बच्चों की तलाश में सभी थानों को सूचना भिजवाकर नाकाबंदी कराई गई। इसके साथ ही बस स्टैंड सहित अन्य स्थानों में उनकी तलाश की गई, लेकिन उनका पता नहीं चल पाया है।

गंभीर मामले में बंद थे बच्चे:

बाल संप्रेक्षण बंदी गृह से भागे पांचों बच्चों पर गंभीर मामले दर्ज हैं। रीवा का एक नाबालिग 388, 402, 25, 27 आर्म्स एक्ट, सिंगरौली के एक बच्चे पर 399, 402 व दूसरे बलात्कार का मामला दर्ज था। सीधी व सिंगरौली के एक-एक बच्चे चोरी के मामले में बंद थे। उन सभी के संबंध में सूचना संबंधित जिलों की पुलिस को भी भेजी गई है।

पुलिस व प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे:

इस घटना की सूचना मिलने पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अनिल सोनकर, एसडीएम अनुराग तिवारी सहित तमाम अधिकारी मौके पर पहुंचे और पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली। इस दौरान कार्यालय की सुरक्षा व्यवस्था का भी जायजा लिया गया। जिस खिड़की को तोड़कर बच्चे भागे हैं, उनकी भी जांच की गई है।

2020 में भी फरार हो गए थे पांच बच्चे:

बाल संप्रेक्षण बंदी गृह से बच्चों के भागने की यह कोई पहली घटना नहीं है। इससे पूर्व भी यहां से बच्चे फरार हो चुके हैं। 31 अप्रैल 2020 को यहां से पांच बच्चे खिड़की तोड़कर फरार हो गए थे, जिनको बाद में पुलिस ने पकड़कर बाल संप्रेक्षण बंदी गृह में पहुंचाया था। 2016 में भी कुछ बच्चे व्यवस्था को धताकर फरार हो गए थे।

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