हरियाली तीज 2022: 13 साल तक बेलपत्र खाने के बाद पार्वती ने की थी तपस्या, जानिए कैसे शुरू हुई हरियाली तीज

जानिए कैसे शुरू हुई हरियाली तीज

हरियाली तीज वह दिन है जब शिव ने पार्वती की तपस्या से प्रसन्न होकर उन्हें अपनी पत्नी बनाने का वरदान दिया था। और तभी से अविवाहित लड़कियां हरियाली तीज के दिन व्रत रखती हैं और अपनी पसंद के वर की कामना करती हैं।

हरियाली तीज के दिन अविवाहित कन्याओं को शिवजी की पूजा करने से मनचाहा वर मिलता है। वहीं विवाहित महिलाएं गौरी-शंकर की पूजा कर पति की लंबी उम्र की कामना करती हैं। यह वह दिन है जब शिव ने पार्वती की तपस्या से प्रसन्न होकर उन्हें अपनी पत्नी बनाने का वरदान दिया था। और तभी से अविवाहित लड़कियां हरियाली तीज के दिन व्रत रखती हैं और अपनी पसंद के वर की कामना करती हैं।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार पार्वती को न जाने कितनी बार कठोर तपस्या करनी पड़ी थी। खुद को साबित करना था। महादेव को प्रसन्न होना पड़ा। पार्वती ने दो बार शिव की कामना की और उन्हें शिव भी मिले, पहले सती के रूप में और फिर उमा के रूप में।

सती के रूप में, पार्वती ने ब्रह्मा के पुत्र दक्ष प्रजापति से जन्म लिया और शिव से विवाह किया, लेकिन दक्ष कभी भी महादेव को अपने दामाद के रूप में स्वीकार नहीं कर सके। पिता की यह जिद आखिरकार सती की मृत्यु के साथ समाप्त हो गई। मृत्यु के समय सती ने भगवान से वरदान मांगा कि हर जन्म में मुझे शिव के चरणों में स्नेह रखना चाहिए। इसलिए उन्होंने हिमालय की पुत्री पार्वती के रूप में पुनर्जन्म लिया।

शिव को पाने के लिए पार्वती की तपस्या

हालांकि सती के वियोग में दुनिया भुला बैठे शिव को दोबारा पति के रूप में पाना इस बार पार्वती के लिए और भी मुश्किल साबित हुआ. पार्वती ने शंकर जी को पाने के लिए घोर तपस्या शुरू कर दी. ऐसा कहते हैं कि उन्होंने 13 साल तक सिर्फ बेलपत्र खाकर भोले शंकर की आराधना की थी.

हरियाली तीज की ऐसे हुई शुरुआत

पार्वती की श्रद्धा देखकर भोले भंडारी प्रसन्न हुए और उन्होंने हरियाली तीज के दिन पार्वती को पत्नी के रूप में स्वीकार कर लिया और फिर धूमधाम से विवाह हुआ. इस तरह तीज के दिन माता पार्वती की कामना पूरी हुई और उन्हें पति के रूप में भगवान शिव प्राप्त हुए. तब माता पार्वती ने प्रसन्न होकर कहा था कि इस दिन जो स्त्री निष्ठा से व्रत और पूजन करेगी, उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होंगी. उसका वैवाहिक जीवन सुखमय रहेगा.

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