ग्राम रेला कोटड़ा में मई 2011 में 17 साल की किशोरी अपने घर से तालाब पर नहाने का कहकर निकली थी। उसके बाद से किशोरी का पता नहीं चला। परिवार के लोगों ने समझा कि तालाब में मगरमच्छ ने उसे अपना शिकार बना लिया। पिता कालू ने गुमशुदगी की रिपोर्ट 2013 में दर्ज करवाई। अब 10 साल बाद जानकारी मिली कि उसने भोपाल में अपना घर बसा लिया।

अब पुलिस ने बेटी को तलाश किया और माता-पिता से मुलाकात कराई। किशोरी की गुमशुदगी की रिपोर्ट पर 17 अधिकारियों ने जांच की, लेकिन कुछ पता नहीं चल पाया। 2021 में ये रिपोर्ट महिला सेल के डीएसपी आशीष पटेल को दी गई तो इन्होंने गांव में परिवारों के साथ कई-कई घंटे बात कर सुराग निकालने की कोशिश की।

पटेल ने तालाब के इतिहास को खंगाला तो पता चला इस तालाब में कोई मगरमच्छ नहीं रहता है। इससे पता चला कि बेटी की मौत नहीं हुई है। उन्होंने रतलाम को जाने वाली रेल लाइन के रास्ते ही ढूंढना शुरू किया। पता चला कि लंबे समय पहले परिवार के लोग भोपाल में मजदूरी के लिए गए थे।

पुलिस ने खोजकर बैंककर्मी बन मांगे पहचान-पत्र तो हुआ खुलासा

आशीष पटेल और उनके एक साथी सिविल ड्रेस में भोपाल पहुंचे। तलाशी शुरू की तो लालघाटी क्षेत्र में मजदूरों की टीम को देखा। यहां एक घर के बाहर झाबुआ जिले के पहनावे के कपड़े सूखते दिखाई दिए। खोजबीन में पता चला कि गुम हुई युवती संतोष मोरी वहीं रहती है।

उसके पास बैंक अधिकारी बनकर पहुंचे और कहा कि तुम्हारे नाम से बैंक में रुपए आए हुए हैं। निकालने के लिए अपने दस्तावेज देना है। दस्तावेज दिए तो साबित हो गया कि लड़की संतोष मोरी ही है। जिसके बाद लड़की के माता-पिता को बुलाया गया। 10 साल बाद बेटी को देख माता-पिता की खुशी का ठिकाना नहीं रहा।

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