नागचंद्रेश्वर मंदिर: साल में 24 घंटे ही खुलता है नागचंद्रेश्वर मंदिर, नेपाल की यह प्रतिमा है बेहद खास

नागचंद्रेश्वर मंदिर उज्जैन: नाग पंचमी सावन माह की शुक्ल पंचमी तिथि को मनाई जाती है. महाकाल की नगरी उज्जैन नगर की कहावत है। इस शहर की गली में एक मंदिर है। लेकिन नागचंद्रेश्वर मंदिर का स्वरूप निराला है। मंदिर की सबसे खास बात यह है कि मंदिर के कपाट नाग पंचमी के दिन ही खुलते हैं।

हरियाली तीज 2022: 13 साल तक बेलपत्र खाने के बाद पार्वती ने की थी तपस्या, जानिए कैसे शुरू हुई हरियाली तीज

तारीख नाग पंचमी 2022 (नाग पंचमी 2022) का पर्व है। इस बार की तारीख नाग पंचमी 2 अगस्त को है. पंचमी के देवता नाग देवता की पूजा करते हैं और देवताओं को देवता मानते हैं। सनातन धर्म में सुधार हुआ है। , नाग पंचमी के अवसर पर जो लोग शिव की पूजा करते हैं और देवता के साथ रुद्राभिषेक करते हैं, शाश्वत जीवन कालसर्प दोष का नाश होता है। एक साथ और केतु कीता को दूर-दूर तक चलने के लिए।

जानिए बाबा बैजनाथ धाम का महत्व, जहां पीएम मोदी करेंगे दर्शन और आरती

महाकाल की नगरी उज्जैन नगर की कहावत है। इस शहर की हर गली में एक मंदिर है। नागचंद्रेश्वर उज्जैन में महाकालेश्वर मंदिर का हिस्सा है। नागचंद्रेश्वर मंदिर का अपना अलग है
महत्व होता है। मंदिर की सबसे खास बात यह है कि साल में केवल एक बार नाग पंचमी के दिन 24 घंटे के लिए मंदिर के कपाट खोले जाते हैं। यही हाल नागचंद्रेश्वर मंदिर का है।

त्रिकाल पूजा की परंपरा:

मान्याताओं के मुताबिक, भगवान नागचंद्रेश्वर की त्रिकाल पूजा की परंपरा है. त्रिकाल पूजा का मतलब तीन अलग-अलग समय पर पूजा. पहली पूजा मध्यरात्रि में महानिर्वाणी होती है, दूसरी पूजा नागपंचमी के दिन दोपहर में शासन द्वारा की जाती है और तीसरी पूजा नागपंचमी की शाम को भगवान महाकाल की पूजा के बाद मंदिर समिति करती है. इसके बाद रात 12 बजे वापिस से एक साल के लिए बंद हो जाएंगे.

नाग पंचमी 2022: कब है नाग पंचमी? इस दिन भूलकर भी न करें ये काम, जानिए शुभ मुहूर्त

पौराणिक कथा

मान्यताओं के मुताबिक, सांपों के राजा तक्षक ने भगवान शिव को मनाने के लिए तपस्या की थी जिससे भोलेनाथ प्रसन्न हुए और सर्पों के राजा तक्षक नाग को अमरत्व का वरदान दिया. वरदान के बाद से तक्षक राजा ने प्रभु के सा‍‍‍न्निध्य में ही वास करना शुरू कर दिया. लेकिन महाकाल वन में वास करने से पूर्व उनकी यही इच्छा थी कि उनके एकांत में विघ्न ना हो.इसलिए यही प्रथा चलती आ रही है कि सिर्फ नागपंचमी के दिन ही उनके दर्शन होते हैं. बाकी समय परंपरा के अनुसार मंदिर बंद रहता है.  दर्शन को उपलब्ध होते हैं. शेष समय उनके सम्मान में परंपरा के अनुसार मंदिर बंद रहता है.

Leave a Reply

Your email address will not be published.