सरकारी अस्पताल में बड़ा इलाजचार दिन की नवजात को पीलिया, ब्रेन तक पहुंच गया था संक्रमणशहडोल के जिला अस्पताल में तीन घंटे चला ऑपरेशन, मासूम की बचाई जान

शहडोल. सरकारी शहडोल में डॉक्टरों ने बड़ा इलाज करते हुए पीलिया के डेंजर जोन में पहुंच चुकी चार दिन की नवजात बच्ची की जान बचाई। जिला अस्पताल के डॉक्टरों ने तीन घंटे ऑपरेशन कर 140 से ज्यादा इंजेक्शन लगाकर बूंद-बूंद खून बदल दिया।

जयसिंहनगर के लफरी गांव निवासी किरण पति पिंटू यादव की बच्ची जन्म के बाद से ही पीलिया की चपेट में आ गई थी। पीलिया 36 मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर पहुंच गया था। सामान्य पांच से ज्यादा नहीं होता है। 15 से ऊपर होने पर ब्रेन के साथ जान को खतरा रहता है। गंभीर अवस्था में उसे बीते 23 दिसंबर की रात जिला अस्पताल के एसएनसीयू में भर्ती कराया गया। डॉ. सुनील हथगेल इलाज कर रहे थे, लेकिन हालत नहीं सुधर रही थी

पहले ले गए थे निजी अस्पताल, वहां अस्पताल के इलाज से नहीं हो रहा था सुधार

अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, परिजन पहले निजी अस्पताल में बालिका को इलाज कराने ले गए थे। वहां भी हालत में सुधार नहीं आया और हालत बिगड़ती गई तो जिला अस्पताल लेकर पहुंचे थे। डॉक्टर हथगेल के अनुसार, 15 मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर पीलिया होने पर ब्रेन के लिए खतरा होता है। बालिका का पीलिया ब्लड ब्रेन बैरियर क्रॉस कर गया था। इससे ब्रेन के लिए भी खतरा था।

नली से दे रहे थे आहार

डॉक्टरों के अनुसार, डबल वॉल्यूम ब्लड एक्सचेंज ट्रांसफ्यूजन खून बदलने की प्रक्रिया को कहा जाता है। इसी के तहत पूरा खून बदलकर नया खून चढ़ाया गया। सेंटर लाइन बनाई गई थी। बताया गया कि बालिका स्तनपान नहीं कर रही थी। ऐसे में उसे नली के जरिए आहार दिया जा रहा था। इलाज के बाद अब बच्ची स्तनपान में सक्षम है।

रात में ही व्यवस्था: ऐसे में डॉक्टरों ने ऑपरेशन का निर्णय लिया। परिजन से सहमति के बाद ब्लड की व्यवस्था कर रात में ही ऑपरेशन की तैयारियां की गई। डॉ. हथगेल के अनुसार, 70 इंजेक्शन के जरिए बच्ची के शरीर से पांच-पांच एमएल खून निकाला गया। 70 इंजेक्शन से नया ब्लड दिया। अब बच्ची स्वस्थ है। टीम में एसएनसी इंचार्ज अपर्णा सिंह विभा सक्या, ज्ञानेश्वरी देशमुख, यशोला बनोटे, प्रज्ञा ठाकुर रहीं।

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